जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर ने घोषणा की है कि वे 2025 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं होंगे। बुधवार को दिए एक बयान में उन्होंने यह स्पष्ट किया, जो उनके पहले के संकेतों के विपरीत है। पूर्व में उन्होंने अपने गृह क्षेत्र करगहर या फिर राघोपुर से चुनाव लड़ने की संभावना जताई थी। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। किशोर के इस निर्णय पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के एक प्रवक्ता ने तंज कसते हुए कहा कि प्रशांत किशोर को अपनी हार का अनुमान है और वे जानते हैं कि चुनाव लड़ने पर उनकी जमानत तक जब्त हो जाएगी। पार्टी ने इसे उनकी राजनीतिक कमजोरी और जमीनी हकीकत से बचने का प्रयास बताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किशोर का यह कदम एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। वे व्यक्तिगत चुनाव लड़ने के बजाय पूरे राज्य में ‘जन सुराज’ को एक विश्वसनीय राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करने पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। भाजपा की तीव्र प्रतिक्रिया यह भी दर्शाती है कि वह किशोर के अभियान को एक संभावित चुनौती के रूप में देख रही है।