पटना, १४ अक्टूबर २०२५। बिहार विधानसभा चुनाव २०२५ की सरगर्मियों के बीच, ‘महागठबंधन’ में सीट-बंटवारे को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसी क्रम में, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने मंगलवार को अपने १८ घोषित उम्मीदवारों की सूची वापस ले ली। पार्टी ने इस फैसले का कारण गठबंधन के भीतर सीटों के आवंटन में हो रही लगातार देरी को बताया है। यह सूची कुछ दिन पहले ही जारी की गई थी, जिससे यह कदम और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
सीपीआई (एमएल) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सहयोगियों के साथ “बातचीत अभी भी जारी है” और उन्हें एक सम्मानजनक समाधान की उम्मीद है। पार्टी का यह कदम सीट-बंटवारे की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए एक दबाव की रणनीति माना जा रहा है। महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और अन्य वामपंथी दल शामिल हैं, जिनके बीच सीटों पर अंतिम सहमति बनना बाकी है। इस घटनाक्रम ने गठबंधन की संयुक्त चुनावी रणनीति की तैयारियों को फिलहाल रोक दिया है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह स्थिति गठबंधन की आंतरिक चुनौतियों को दर्शाती है। यदि सीट-बंटवारे का यह गतिरोध जल्द नहीं सुलझा, तो इसका सीधा असर कार्यकर्ताओं के मनोबल और चुनावी अभियान पर पड़ सकता है। यह देरी विपक्षी गठबंधन को मनोवैज्ञानिक बढ़त दे सकती है। अब सारा दबाव गठबंधन के बड़े दलों पर है कि वे सहयोगियों को एकजुट रखते हुए जल्द से जल्द एक सर्वमान्य समाधान निकालें।