नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को झारखंड के निलंबित आईएएस अधिकारी छवि रंजन को जमानत दे दी। रंजन पिछले 30 महीनों से भूमि घोटाले से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में न्यायिक हिरासत में थे। न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मुकदमे को समाप्त करने में हो रही अत्यधिक देरी को जमानत का मुख्य आधार बनाया। अपनी टिप्पणी में, शीर्ष अदालत ने कहा कि यद्यपि आरोप गंभीर हैं, लेकिन किसी आरोपी को अनिश्चितकाल तक मुकदमे की प्रतीक्षा में जेल में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने त्वरित न्याय के अधिकार को सर्वोपरि माना। जमानत की शर्तों के तहत, छवि रंजन को झारखंड राज्य से बाहर यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें जांच में सहयोग करना जारी रखना होगा और अपना पासपोर्ट भी जमा करने का निर्देश दिया गया है। यह मामला रांची में भूमि रिकॉर्ड में कथित हेरफेर से जुड़ा है। यह फैसला जांच एजेंसियों पर समयबद्ध तरीके से अपनी कार्यवाही पूरी करने का दबाव डालता है। विश्लेषकों का मानना है कि यह आदेश उन अन्य मामलों के लिए एक नजीर बन सकता है, जहां आरोपी लंबी अवधि से मुकदमे की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह न्याय प्रणाली में ‘बेल, नॉट जेल’ के सिद्धांत को भी पुष्ट करता है, विशेषकर जब जांच में अनावश्यक विलंब हो रहा हो। यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानूनी प्रक्रिया की समय-सीमा के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण न्यायिक कदम है।