नई दिल्ली। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की अप्रत्याशित घटना के संबंध में वकील राकेश किशोर के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए अपनी सहमति दे दी है। यह महत्वपूर्ण निर्णय गुरुवार, 16 अक्टूबर 2025 को लिया गया। इस आधिकारिक मंजूरी के बाद, अब देश का सर्वोच्च न्यायालय इस गंभीर मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगा। यह घटना न्यायपालिका की गरिमा पर एक सीधे हमले के रूप में देखी जा रही है। वकील राकेश किशोर द्वारा किया गया यह कृत्य न्यायिक प्रक्रिया के दौरान हुआ, जिसने न्यायालय के सम्मान को गंभीर ठेस पहुँचाई है। अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत, किसी निजी व्यक्ति द्वारा अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए अटॉर्नी जनरल की सहमति एक अनिवार्य शर्त होती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी न्यायिक प्रणाली के सर्वोच्च प्रतीक पर किया गया हमला है। अटॉर्नी जनरल की सहमति इस बात को रेखांकित करती है कि न्यायपालिका की गरिमा और अधिकार को बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। इस तरह के कृत्यों को रोकने और न्याय के मंदिर में अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए अवमानना कानून एक आवश्यक उपकरण है। यह मामला भविष्य के लिए एक कड़ा संदेश देता है कि न्यायालय के प्रति किसी भी प्रकार के अनादर को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कानून अपना काम पूरी गंभीरता से करेगा।