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🟦 परिचय (Introduction) – Procedure of Arrest and Rights of Arrested Person
“गिरफ्तारी” (Arrest) आपराधिक न्याय प्रणाली का प्रारंभिक और अत्यंत संवेदनशील चरण है।
यह वह स्थिति है जब राज्य (State) किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता (personal liberty) को अस्थायी रूप से सीमित करता है।
परंतु भारतीय न्याय दर्शन इस सिद्धांत पर आधारित है कि —

“Liberty is the rule, and arrest is an exception.” (35-40 BNSS)
अक्सर पुलिस द्वारा बिना उचित कारण या प्रक्रिया के गिरफ्तारी की घटनाएँ न्यायिक आलोचना का विषय रही हैं।
इसीलिए, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 ने धारा 35 से 40 तक गिरफ्तारी से जुड़ी प्रक्रिया और गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकारों को और अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और मानवीय (humanized) बनाया है।
⚖️ कानूनी पृष्ठभूमि (Legal Background) – Procedure of Arrest and Rights of Arrested Person
पहले ये प्रावधान Criminal Procedure Code, 1973 (CrPC) की धारा 41 से 50 तक थे।
BNSS 2023 ने इन्हीं धाराओं को धारा 35 से 40 तक पुनर्लेखित किया है, जिससे arrest प्रक्रिया में:
- Accountability (जवाबदेही),
- Transparency (पारदर्शिता), और
- Technology integration (प्रौद्योगिकी का उपयोग) सुनिश्चित किया गया है।
⚖️ BNSS 2023 — गिरफ्तारी से संबंधित मुख्य धाराएँ (Sections 35–40 BNSS)
| धारा | विषय | सारांश |
|---|---|---|
| §35 | Arrest how made | गिरफ्तारी करने की विधि — पहचान, सूचना, और restraint की सीमा। |
| §36 | Procedure when arrest is made without warrant | वारंट के बिना गिरफ्तारी की प्रक्रिया और सीमाएँ। |
| §37 | Notice of appearance before police officer | “Pre-Arrest Notice” प्रणाली (Arnesh Kumar guideline codified)। |
| §38 | Arrest on warrant | वारंट के माध्यम से गिरफ्तारी की प्रक्रिया। |
| §39 | Arrest by private person | निजी व्यक्ति द्वारा गिरफ्तारी के अपवादात्मक प्रावधान। |
| §40 | Rights of arrested person | गिरफ्तार व्यक्ति के वैधानिक अधिकारों की गारंटी। |
⚖️ धारा 35 — गिरफ्तारी की विधि (Procedure of Arrest )
गिरफ्तारी केवल कानूनी रूप से अधिकृत अधिकारी द्वारा की जा सकती है।
अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि:
- वह अपना नाम, पद और पहचान स्पष्ट रूप से बताए।
- आरोपी को गिरफ्तारी का कारण समझाए।
- गिरफ्तारी के दौरान अत्यधिक बल या अपमानजनक व्यवहार न किया जाए।
- महिला की गिरफ्तारी केवल महिला पुलिस अधिकारी द्वारा की जा सकती है और सूर्योदय के बाद ही, जब तक कि अपरिहार्य स्थिति न हो।
⚖️ धारा 36 — वारंट के बिना गिरफ्तारी (Arrest Without Warrant)
यह प्रावधान पुराने CrPC §41 के स्थान पर है।
BNSS §36 में कहा गया है कि पुलिस अधिकारी केवल तभी बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकता है, जब:
- अपराध गंभीर (cognizable offence) हो,
- गिरफ्तारी अपरिहार्य (necessary) हो — जैसे:
- अपराध को रोकना,
- सबूत नष्ट होने से बचाना,
- आरोपी के फरार होने की संभावना।
📌 महत्वपूर्ण परिवर्तन:
अब अधिकारी को यह लिखित रूप में बताना होगा कि गिरफ्तारी क्यों आवश्यक है।
यह प्रक्रिया Arnesh Kumar Judgment (2014) के अनुसार कानूनी रूप से बाध्यकारी (mandatory) की गई है।
⚖️ धारा 37 — गिरफ्तारी से पूर्व सूचना (Notice of Appearance)
यह BNSS की सबसे आधुनिक और नागरिक-मित्र (citizen-friendly) धारा मानी जाती है।
“जहाँ गिरफ्तारी आवश्यक न हो, वहाँ पुलिस अधिकारी आरोपी को एक नोटिस जारी कर सकता है कि वह जांच में शामिल होने के लिए उपस्थित हो।”
यह “Pre-Arrest Notice System” अब एक statutory rule बन गई है, जो पहले केवल Arnesh Kumar vs State of Bihar (2014) के रूप में न्यायिक दिशा-निर्देश (guideline) था।
🔹 Arnesh Kumar Case (2014) 8 SCC 273 — Analysis –
तथ्य: पति को पत्नी द्वारा 498A IPC (अब BNS §85) के तहत झूठे मामले में फँसाने का आरोप था।
निर्णय: सुप्रीम कोर्ट ने कहा —
“No arrest should be made merely because the offence is non-bailable and cognizable. The police must justify the necessity of arrest.”
BNSS में प्रभाव:
अब हर अधिकारी को गिरफ्तारी से पहले लिखित कारण दर्ज करना होगा और जहाँ गिरफ्तारी आवश्यक न हो, वहाँ “Notice of Appearance” जारी करना होगा।
⚖️ धारा 38 — वारंट द्वारा गिरफ्तारी (Arrest by Warrant )
वारंट केवल Magistrate द्वारा जारी किया जा सकता है।
BNSS §38 में निर्देश है कि:
- वारंट लिखित रूप में, मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर से जारी होगा।
- इसमें स्पष्ट रूप से आरोपी का नाम, अपराध का विवरण, और पेशी का आदेश होगा।
- इलेक्ट्रॉनिक वारंट भी मान्य होंगे — (BNSS §530 – E-authenticated documents)।
⚖️ धारा 39 — निजी व्यक्ति द्वारा गिरफ्तारी (Arrest by Private Person – Procedure of Arrest )
BNSS §39 के अंतर्गत, यदि कोई व्यक्ति किसी को गंभीर अपराध करते हुए देखता है,
तो वह अपराधी को गिरफ्तार कर सकता है, परंतु उसे तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में प्रस्तुत करना होगा।
यह प्रावधान सार्वजनिक सुरक्षा और नागरिक सहयोग की भावना को सशक्त बनाता है।
⚖️ धारा 40 — गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकार (Rights of the Arrested Person)
यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 और 22(1) के साथ गहराई से जुड़ा है।
गिरफ्तार व्यक्ति के निम्नलिखित अधिकार BNSS §40 में गारंटीकृत हैं 👇
| अधिकार | विवरण |
|---|---|
| 1. सूचना का अधिकार | गिरफ्तारी का कारण और आरोप की प्रकृति बताई जानी चाहिए। |
| 2. अधिवक्ता से मिलने का अधिकार (Right to Counsel) | आरोपी को तुरंत वकील से संपर्क करने और परामर्श का अधिकार है। |
| 3. परिवार/मित्र को सूचना देने का अधिकार | गिरफ्तारी की सूचना परिवार या मित्र को दी जानी चाहिए। |
| 4. चिकित्सीय परीक्षण (Medical Examination) | हर गिरफ्तार व्यक्ति का चिकित्सीय परीक्षण अनिवार्य है। |
| 5. 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी | अनुच्छेद 22(2) और BNSS §41 के तहत 24 घंटे से अधिक हिरासत अवैध मानी जाएगी। |
| 6. डिजिटल रेकॉर्डिंग और बायोमेट्रिक डेटा | BNSS §42 के अनुसार गिरफ्तारी के समय इलेक्ट्रॉनिक डेटा सुरक्षित रखा जाएगा। |
⚖️ महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय (Judicial Precedents – Procedure of Arrest )
- Joginder Kumar vs State of U.P. (1994) 4 SCC 260 “No arrest can be made because it is lawful; arrest must be justified.”
इस निर्णय ने “necessity test” स्थापित किया। - D.K. Basu vs State of West Bengal (1997) 1 SCC 416 सुप्रीम कोर्ट ने “Arrest Guidelines” जारी कीं —
- Arrest memo अनिवार्य,
- परिवार को सूचना,
- मेडिकल जांच,
- रजिस्टर में प्रविष्टि,
- आरोपी को अधिकारों की सूचना।
अब ये सभी प्रावधान BNSS §§40–42 में statutorily codified हैं।
- Arnesh Kumar vs State of Bihar (2014) अब BNSS §37 में शामिल — “Pre-arrest notice before arrest” अनिवार्य है।
⚖️ BNSS बनाम CrPC — तुलनात्मक सारणी (Comparison Table) Procedure of Arrest and Rights of Arrested Person
| पहलू | CrPC 1973 | BNSS 2023 | मुख्य सुधार |
|---|---|---|---|
| गिरफ्तारी की धाराएँ | §§41–50 | §§35–42 | आधुनिक भाषा, digital format. |
| गिरफ्तारी का कारण बताना | वैकल्पिक | अनिवार्य (§35) | Police accountability. |
| बिना वारंट गिरफ्तारी | §41 | §36 | “Necessity clause” जोड़ा गया। |
| Pre-arrest notice | Guideline (Arnesh Kumar) | Statutory (§37) | अब कानून में शामिल। |
| Arrest memo | Judicial guideline | Mandatory statutory (§40) | Legal safeguard. |
| Electronic record | Not covered | E-documentation (§530) | Transparency & traceability. |
⚖️ निष्कर्ष (Conclusion)
धारा 35 से 40, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 ने गिरफ्तारी प्रक्रिया को पूरी तरह मानवाधिकार-केंद्रित (human-rights oriented) बना दिया है।
अब किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी राज्य की शक्ति नहीं, बल्कि न्यायिक जिम्मेदारी बन गई है।
“Arrest is not a tool of harassment — it is a tool of justice.”
BNSS 2023 ने न केवल Arnesh Kumar (2014), D.K. Basu (1997), और Joginder Kumar (1994) जैसे ऐतिहासिक निर्णयों को कानूनी रूप में समाहित किया है, बल्कि arrest प्रक्रिया को डिजिटल युग के अनुरूप भी बना दिया है।
अब हर गिरफ्तारी:
- reasoned होगी,
- recorded होगी, और
- reviewable होगी।
⚖️ मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- Section 35–40 govern arrest procedure and rights.
- Arrest must be justified, recorded, and communicated.
- Pre-Arrest Notice (§37) = now statutory law.
- Arnesh Kumar, Joginder Kumar, D.K. Basu = now part of the structure.
- Electronic records and arrest memos = mandatory.
- Women’s arrest → only by woman officer (§35(4)).
- 24-hour rule + Right to counsel = fundamental under Art. 22.
Legal Disclaimer:
यह लेख केवल सामान्य शैक्षणिक (educational) एवं सूचना (informational) उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसे किसी भी प्रकार की legal advice, legal opinion या professional consultation का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।कानून समय, परिस्थितियों, संशोधनों (amendments) एवं न्यायालयीन व्याख्याओं (judicial interpretations) के अनुसार बदलता रहता है। इसलिए किसी भी कानूनी निर्णय, कार्यवाही या मुकदमे (case / proceeding) से पहले कृपया योग्य अधिवक्ता (qualified advocate) या legal professional से परामर्श अवश्य लें।
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