नई दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा को मज़बूत करने की दिशा में एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए, भारतीय सुरक्षा बल पहली बार 150 देसी नस्ल के कुत्तों को विशेष कमांडो अभियानों के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं। यह पहल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र के दौरे के बाद शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य सुरक्षा अभियानों में विदेशी नस्लों पर निर्भरता कम करना और भारतीय नस्लों को बढ़ावा देना है। इस कार्यक्रम में मुधोल हाउंड और बखरवाल जैसी नस्लों को शामिल किया गया है, जो अपनी सहनशीलता, फुर्ती और स्थानीय जलवायु के प्रति अनुकूलन के लिए जानी जाती हैं। इन कुत्तों को विस्फोटक का पता लगाने, घुसपैठियों को ट्रैक करने और आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहायता के लिए कठोर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह कार्यक्रम रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण पर जोर देने वाले ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की भावना के अनुरूप है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। देसी नस्लें विदेशी नस्लों की तुलना में रखरखाव में सस्ती हैं और भारतीय मौसम व कठिन इलाकों में बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। इस पहल से न केवल सुरक्षा बलों की अभियानगत क्षमता बढ़ेगी, बल्कि यह इन देसी नस्लों के संरक्षण को भी प्रोत्साहित करेगा। हालांकि, विभिन्न नस्लों के लिए मानकीकृत प्रशिक्षण प्रोटोकॉल विकसित करना एक चुनौती होगी। इस प्रयास की सफलता भविष्य में सुरक्षा बलों की संरचना को स्थायी रूप से बदल सकती है, जिससे आत्मनिर्भरता को और बढ़ावा मिलेगा।