नई दिल्ली, 20 अक्टूबर। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने की निर्णायक घोषणा की है। पार्टी ने इस अप्रत्याशित फैसले का कारण विपक्षी दलों, विशेषकर महागठबंधन के सहयोगियों, द्वारा सीट-बंटवारे में किए गए कथित अनादर और गहरे विवादों को बताया है। यह घोषणा पार्टी द्वारा पहले अकेले चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद आई है। इसके साथ ही, झामुमो ने झारखंड में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ अपने सत्तारूढ़ गठबंधन की व्यापक ‘समीक्षा’ करने का भी ऐलान किया है। यह निर्णय बिहार चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे पर महागठबंधन के भीतर चल रहे गंभीर तनाव के बीच आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झामुमो का यह कदम केवल बिहार की चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं है। इसका दूरगामी असर झारखंड की गठबंधन सरकार की स्थिरता पर भी पड़ सकता है। गठबंधन की समीक्षा का ऐलान सहयोगी दलों पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है, ताकि भविष्य में अपनी शर्तों पर बेहतर मोलभाव किया जा सके। इस बिखराव का सीधा फायदा बिहार में सत्ताधारी गठबंधन को मिलने की प्रबल संभावना है। यह घटनाक्रम विपक्षी खेमे में समन्वय की भारी कमी और आंतरिक कलह को स्पष्ट रूप से उजागर करता है, जो चिंताजनक है।