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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित जियो कन्वेंशन सेंटर में छठे ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल 2025 को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत की तकनीकी प्रगति, विशेषकर फिनटेक क्षेत्र में, ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों के समूह) के लिए आशा की एक किरण है। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत द्वारा विकसित डिजिटल भुगतान और लेनदेन की तकनीक को 25 से अधिक देशों ने स्वीकार किया है और वे इसे अपने यहां लागू कर रहे हैं। उन्होंने इस सफलता का श्रेय भारत के मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को दिया, जिसने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देकर करोड़ों लोगों के जीवन को सरल बनाया है। मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रौद्योगिकी का लक्ष्य मानव-केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने फिनटेक उद्योग से आग्रह किया कि वे सुरक्षित व सुलभ वित्तीय समाधान बनाने के लिए नवाचार जारी रखें। प्रधानमंत्री का यह वक्तव्य वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती तकनीकी और कूटनीतिक शक्ति को दर्शाता है। 25 से अधिक देशों द्वारा भारतीय तकनीक को अपनाना इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल प्रौद्योगिकी का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक प्रमुख निर्यातक और नवाचार केंद्र बन गया है। यह कदम ‘ग्लोबल साउथ’ के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करता है और उसे एक विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में स्थापित करता है।

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