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एक भव्य और शाही throne, जो लाल रंग के कपड़े से ढका हुआ है, उसके पास एक गोल्डन बालती के साथ मोमबत्तियाँ हैं, जिससे एक ऐतिहासिक और विलासिता का अनुभव होता है।

प्रिय पाठकों

वर्ष 2025 समाप्त होने को है और इसके समाप्त होते ही हम 21वीं शताब्दी के एक चौथाई सफर को तय कर चुके होंगे । ये 25 वर्ष विश्व के geopolitics में कई उथल पुथल का गवाह रहे । इस कालखंड के प्रारंभिक वर्ष मुख्यतः मध्य एशिया में अराजकता के वर्ष रहे चाहे वो इराक में सद्दाम हुसैन और लीबिया में मुअम्मर गद्दाफी का सत्ता से बेदखल होना हो या अफगानिस्तान में तालिबान का शासन में आना हो लेकिन अचानक से COVID के बाद ये राजनैतिक संकट दक्षिण एशिया खासकर भारत के पड़ोस में पनपने लगे और इसने भारत के लिए चिंताए बढ़ा दी है । इस राजनैतिक घटनाक्रम को पहले एक – एक कर नजर डालते है –

a) Myanmar – February 2021 में भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में सैन्य तख्तापलट हो जाता है और जून्टा शासन वहां के सत्ता पर काबिज हो जाता है । जून्टा सरकार यानि सैन्य तख्तापलट कर बानी सरकार को मूल रूप से चीन के खेमे का माना जाता है और जाहिर है की चीन अब म्यांमार को अपने हिसाब से चला रहा है । चीन को इससे दोहरा फायदा है । एक तो वह म्यांमार में अपने लोग भेजकर भारत पर नजर रख सकता है तो दूसरी तरफ म्यांमार के रास्ते उसकी पहुँच बंगाल की खाड़ी तक हो गयी जिससे अपने व्यापारिक जहाजों को यूरोप और अफ्रीका तक भेज सकता है और सैन्य जहाजों के लिए naval base भी बना सकता है।

b) Pakistan – April/May 2022 को पाकिस्तान में चुनी हुयी सरकार जो गिरा दिया जाता है और PM Imran Khan को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाता है जो अभी भी जेल में ही है । यहाँ ये बताना जरुरी है की पाकिस्तान में ये आम बात है क्योंकि 1947 में आजाद हुए पाकिस्तान में अबतक कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा यही कर पाए हैं और सैन्य तख्तापलट भी कई बार हो चूका है लेकिन इस बार के घटनाक्रम को अमेरिका से जोड़कर देखा जा रहा है और विशेषज्ञ इसे अमेरिकन deep state की करतूत बता रहे है ।

c) Srilanka – July 2022 को श्रीलंका में Gotabaya Rajpakse को भी जनता के विद्रोह के नाम पर भीषण अराजकता का सामना करना पड़ता है और देश छोड़कर भागना पड़ता है । वहां तो हालत इतने ख़राब थे की विद्रोहियों ने आंदोलन के नाम पर करोड़ों की संपत्ति जला दी और सरकारी भवनों में आग लगा दी। इसकी भी नीवं चीन ने रखी और विकास के नाम पर श्रीलंका को लोन देते रहे और ये आंकड़ा इतना बढ़ गया की दिवालियेपन की स्तिथि आ गयी और आंदोलन के नाम पर regime change हो गया और चीन ने इसके बाद श्रीलंका में भारत को हटाकर अपना वर्चस्व बढ़ाने की कोशिश की हालाँकि जल्द ही वहां के लोगों को समझ में आ गया और वो वापस भारत से दोस्ती की राह पर आ गया ।

d) Maldives – यहाँ November 2023 में Md Muizzu ने सत्ता संभाली तथा ये सत्ता हस्तांतरण चुनाव के द्वारा ही हुआ लेकिन इसके पहले Muizzu ने जो Anti India campaign चलाया उसने इसे एक स्वाभाविक सत्ता हस्तांतरण के दावे को ख़ारिज कर सिया । यहाँ भी कहानी श्रीलंका जैसी हुई और मालदीव को कर्ज के जाल में चीन द्वारा फंसाकर फिर उसके सैन्य दुरूपयोग की कोशिश की गयी । ये देश भी अब सब कुछ समझ चूका है और भारत के कूटनीतिक प्रयासों से मालदीव भी फिर से भारत के पक्ष में खड़ा दिख रहा है ।

e) Bangladesh – 5 August 2024 को बांग्लादेश के इतिहास में एक काले अधयाय के शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि इस दिन न सिर्फ एक चुनी हुई सरकार को गिराकर प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा बल्कि इसके बाद अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर नृसंश अत्याचार शुरू हुए। उनके पूजा स्थलों को तोड़ा गया और उनकी हत्या की गयी। बात इतनी बिगड़ गयी की शेख हसीना के घर से उनके कपड़ों और सामान की भी लूट की गयी। इसके बाद जो अंतरिम सरकार बनी उसके मुखिया अमेरिकी पसंद के Md Yunus बने ।

f) Nepal – सितम्बर 2025 नेपाल के लिए बिलकुल बांग्लादेश जैसे हालत लेकर आया और हज़ारों लोग आंदोलन के नाम पर सड़क पर आ गए और प्रधानमंत्री K P Sharma Oli और उनके मंत्रियों को इस्तीफा देकर जान बचाकर भागना पड़ा। यहाँ भी सरकारी संपत्ति और निजी प्रतिष्ठानों को व्यापक क्षति पहुंचाई गयी। यहाँ ये गौर करने वाली बात है की नेपाल में अब तक की चल रही सरकार चीन समर्थक थी और चीन के ही प्रभाव में काम कर रही थी ।

अब ऊपर के उदाहरणों को अगर गौर करें तो एक बात तो स्पष्ट है की इन सारे दक्षिण एशियाई देशों में सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ बल्कि बाहरी देशों की मर्जी के अनुसार नयी सरकार बनी और अब वही बाहरी देश इन देशों में अपनी मनमानी करने में लगे है । इस जटिल हालात में भारत को काफी सावधानी बरतने की जरुरत है क्योंकि इन अस्थिर पड़ोसियों से घिरा होने के कारन भारत भी इनसे प्रभावित हो सकता है । भारत को अपनी कूटनीतिक प्रयासों से इनका हल खोजकर पुनः शांति स्थापना की दिशा में पहल करने की जरुरत है ।

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