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प्रिय पाठकों ,
BNS यानि (Bhartiya Nyay Sanhita) एक नया आपराधिक कानून है, जिसे वर्ष 2024 को लाया गया और इसे 1 जुलाई 2024 से देश मे लागु किया गया । असल में इसके पहले जो कानून था , यानि IPC (Indian Penal Code ) , वो कानून 1861 का था और इतने पुराने कानून के विसंगतियों के कारन इस नए कानून यानि BNS को लाया गया । वैसे तो जब भी किसी कानून को संसोधन करने के बजाय उसे पूरी तरह से बदल दिया जाता है तो ये स्वाभाविक है की परिवर्तन बड़े पैमाने पर होंगे , इसलिए यहाँ हम कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तनों के बारे में जानेंगे –
1) इसमें धाराओं की संख्या IPC के 511 के बजाय सिर्फ 358 रखी गयी है। इस तरह न सिर्फ कुछ अनावश्यक धाराओं को समाप्त कर दिया है बल्कि कुछ का पुनर्गठन भी किया गया है।
2) इसमें sedition (Section 124 A ), Thug (Section 310), Unnatural offence (Section 377), Adultery (Section 497) जैसी कुछ पुरानी और अनावश्यक धाराओं को समाप्त कर दिया गया है ।
3) BNS में कुछ नए क्रियाकलाप को अपराध की श्रेणी में रखा गया है , जैसे –
a) Abetment outside India , (Section 48 ) , यानि भारत के बाहर से कोई व्यक्ति अगर किसी को भारत में अपराध करने के लिए उकसाता है तो उसे धारा 48 के तहत दोषी माना जायेगा ।
b) Sexual intercourse by employing deceitful means , (Section 69) , यानि शादी का झांसा देकर किसी महिला का यौन शोषण करने को धारा 69 के तहत अपराध माना जायेगा।
c) Mob lynching , (Section 103 , clause 2 ), यानि भीड़ द्वारा की गयी हत्या । इस तरह की घटनाएं कभी कभी सुनने को मिलती है की किसी जगह किसी जाति , धर्म या कभी कभी अफवाह के कारन भी भीड़ कानून को अपने हाथ में लेकर किसी व्यक्ति की पीटकर हत्या कर देती है तो पहले IPC में इसके लिए अलग से कुछ प्रावधान नहीं था और इसे मर्डर की धारा लगाकर FIR दर्ज होता था लेकिन इस नए कानून में इस घटना की गंभीरता को समझा गया और अलग से धारा 103 (2) के तहत अपराध माना गया।
d) Organized crime , ( Section 111 ) , यानि संगठित अपराध जिसकी पहले अलग से कोई व्याख्या नहीं थी , उसे परिभाषित कर धारा 111 के तहत अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
e) Terrorist Act , (Section 113) , BNS में आतंकवाद को धारा 113 में विस्तृत रूप में परिभासित कर उसे अपराध माना गया है तथा सजा का प्रावधान रखा गया है । IPC में इस तरह की कोई व्याख्या नहीं थी और ऐसी कोई घटना घटने पर उसे राजद्रोह में गिना जाता था।
4) Attempt to commit suicide में बदलाव ( Section 226 ) , हम जानते है की IPC की धारा 309 में attempt to commit suicide को अपराध माना गया था और इसी धारा के तहत केस होता था लेकिन अदालत के द्वारा दिए गए सुझावों के बाद इस धारा के तहत केस होना बंद हो गया था । BNS में सरकार ने इस विषय को गंभीरता से लिया और इसे ख़त्म कर दिया लेकिन अगर आत्महत्या का भय दिखाकर कोई व्यक्ति किसी सरकारी कर्मचारी को duty में बाधा पहुचाये तो उस व्यक्ति पर धारा 226 के तहत FIR हो सकता है।
5) Introduction of community service as punishment (Section 4 f ) , BNS में community service को एक सजा के तौर पर मान्यता दी गयी है और अदालत कुछ petty offences में इस तरह की सजा दे सकता है।
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