Table of Contents
Introduction
🔹 मुद्रास्फीति क्या होती है? (What is Inflation?)
मुद्रास्फीति का मतलब होता है — जब चीज़ों के दाम (Prices) बढ़ने लगते हैं और पहले जितने पैसे में आप ज़्यादा चीज़ें खरीद सकते थे, अब उतने में कम चीज़ें मिलती हैं।

👉 आसान भाषा में:
अगर पिछले साल 100 रुपये में 5 किलो चावल मिलता था, और अब उसी 100 रुपये में सिर्फ 4 किलो मिल रहा है —
तो इसका मतलब है कि पैसे की कीमत घट गई और चीज़ों की कीमत बढ़ गई।
इसे ही Inflation कहते हैं।
🔸 Inflation को मापने के दो मुख्य तरीके होते हैं —
1. WPI (Wholesale Price Index – थोक मूल्य सूचकांक)
और
2. CPI (Consumer Price Index – उपभोक्ता मूल्य सूचकांक)
आइए इन्हें बहुत आसान भाषा में समझते हैं 👇
🏭 1. WPI – Wholesale Price Index (थोक मूल्य सूचकांक)
मतलब:
यह बताता है कि थोक बाजार (Wholesale Market) में वस्तुओं के दाम कितने बढ़े या घटे हैं।
यह वह स्तर है जहाँ दुकानदार या व्यापारी बड़ी मात्रा में सामान खरीदते हैं — यानी Retail (खुदरा) से पहले का स्तर।
👉 उदाहरण:
अगर फैक्टरी से निकलने वाला साबुन, पेट्रोल, या गेहूँ थोक बाजार में महँगा हो गया, तो WPI बढ़ेगा।
यानी, WPI हमें यह बताता है कि
“उत्पादन और थोक स्तर पर कीमतें कितनी बढ़ रही हैं।”
कौन जारी करता है:
भारत सरकार का DPIIT (Department for Promotion of Industry and Internal Trade)।
क्यों ज़रूरी है:
क्योंकि इससे यह पता चलता है कि निर्माण लागत (Cost of Production) बढ़ रही है या नहीं — और आगे चलकर उपभोक्ताओं पर कितना असर पड़ेगा।
🛒 2. CPI – Consumer Price Index (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक)
मतलब:
यह बताता है कि आम लोगों को रोज़मर्रा की चीज़ें खरीदने में कितनी महँगाई महसूस हो रही है।
CPI खुदरा (Retail) स्तर की कीमतें मापता है — यानी वही दाम जो आप और मैं दुकान पर जाकर चुकाते हैं।
👉 उदाहरण:
अगर दाल, दूध, गैस सिलेंडर, किराया, या बस किराए के दाम बढ़ते हैं —
तो CPI Inflation बढ़ती है।
यानी, CPI हमें यह बताता है कि
“आम जनता की जेब पर महँगाई का कितना असर है।”
कौन जारी करता है:
भारत का NSO (National Statistical Office)।
क्यों ज़रूरी है:
क्योंकि RBI (Reserve Bank of India) जब ब्याज दरें तय करती है (जैसे Repo Rate बढ़ाना या घटाना),
तो वह CPI को देखकर निर्णय लेती है।
⚖️ WPI और CPI में आसान अंतर:
| बिंदु | WPI | CPI |
|---|---|---|
| पूरा नाम | Wholesale Price Index | Consumer Price Index |
| कहाँ की कीमतें मापता है | थोक बाजार (Wholesale) | खुदरा बाजार (Retail) |
| कौन प्रभावित होता है | व्यापारी, निर्माता | आम जनता (Consumers) |
| कौन जारी करता है | DPIIT | NSO |
| क्या मापता है | वस्तुओं की कीमतें | वस्तुएँ + सेवाएँ दोनों |
| किसे उपयोग करता है | उद्योग, सरकार | RBI और नीति निर्माता |
| आधार वर्ष | 2011–12 | 2012 |
🧠 आसान याद रखने का तरीका:
- WPI = Wholesale = व्यापारियों की महँगाई
- CPI = Consumer = जनता की महँगाई
📍 मुख्य निष्कर्ष (In Short):
- Inflation का मतलब है चीज़ों के दाम बढ़ना।
- WPI बताता है — थोक स्तर पर कितनी महँगाई है।
- CPI बताता है — आम जनता को कितनी महँगाई महसूस हो रही है।
- RBI अपनी नीतियाँ (जैसे ब्याज दरें) CPI को देखकर तय करती है, क्योंकि वही सच्ची महँगाई का असर दिखाता है।
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