बिहार विधानसभा चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन में टिकट बंटवारे को लेकर आंतरिक कलह सतह पर आ गई है। कई नेताओं ने टिकट न मिलने पर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए टिकट के बदले पैसे मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस के मोहम्मद अफाक आलम ने राहुल गांधी से इस मामले की जांच की मांग की है, और टिकट वितरण में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में भी स्थिति तनावपूर्ण है। टिकट से वंचित मदन प्रसाद ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास के बाहर विरोध किया। एक अन्य नेता, रितु जायसवाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। इन घटनाओं ने गठबंधन के भीतर चल रही खींचतान को उजागर कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंतरिक विवाद चुनाव में गठबंधन की संभावनाओं को कमजोर कर सकता है। इन आरोपों से न केवल गठबंधन की छवि पर नकारात्मक असर पड़ेगा, बल्कि बाग़ी उम्मीदवारों के निर्दलीय लड़ने से वोटों का बंटवारा भी हो सकता है, जिसका सीधा फायदा विपक्ष को मिलने की आशंका है। गठबंधन नेतृत्व के लिए इस संकट का समाधान करना एक बड़ी चुनौती होगी, जिसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ेगा।