अगले सप्ताह आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित आसियान-पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाग लेने की प्रबल संभावना है। हालांकि भारत की ओर से इस यात्रा की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन मलेशिया के विदेश मंत्री ने एक बयान में उनकी उपस्थिति को लेकर आश्वस्ति जताई है। यह सम्मेलन दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों और उनके प्रमुख संवाद भागीदारों के लिए एक केंद्रीय मंच के रूप में कार्य करता है, जहाँ महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाता है। इस सम्मेलन का सामरिक महत्व असाधारण है, क्योंकि यह प्रधानमंत्री मोदी को क्वाड देशों (अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) और ब्रिक्स समूह (चीन, रूस) के शीर्ष नेताओं के साथ एक ही मंच पर संवाद का अवसर प्रदान करेगा। यह स्थिति भारत की स्वतंत्र और बहु-संरेखण विदेश नीति को रेखांकित करती है, जिसमें वह प्रतिस्पर्धी वैश्विक शक्तियों के साथ अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर संतुलन बनाकर संबंध स्थापित करता है। इन उच्च-स्तरीय बैठकों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती, आर्थिक सहयोग और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है। यह भारत के लिए एक अवसर होगा कि वह अपनी कूटनीतिक पहुँच का विस्तार करे और वैश्विक चुनौतियों पर एक आम सहमति बनाने की दिशा में अपनी भूमिका को और अधिक सुदृढ़ करे।

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