नई दिल्ली, 19 अक्टूबर। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट में बिहार विधानसभा के कामकाज से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य विधानसभा की बैठकें प्रति वर्ष औसतन केवल 29 दिन ही आयोजित हुईं। यह आँकड़ा विधायी चर्चा और कानून निर्माण के लिए उपलब्ध सीमित अवधि को दर्शाता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस दौरान कुल 251 विधायकों ने सक्रिय रूप से भाग लेते हुए 22,505 प्रश्न पूछे। प्रश्न पूछने में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक अरुण शंकर प्रसाद 275 प्रश्नों के साथ सबसे आगे रहे। वहीं, कांग्रेस के विधायक मनोहर प्रसाद सिंह ने 231 प्रश्न पूछकर दूसरा स्थान प्राप्त किया। यह आँकड़ा सदन में सदस्यों द्वारा उठाए गए मुद्दों की मात्रा को स्पष्ट करता है। विश्लेषकों का मानना है कि बैठकों की यह कम औसत संख्या लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कमी की ओर इशारा करती है। सदन की कम बैठकें होने से जनहित के मुद्दों पर विस्तृत बहस और सरकार के कामकाज की गहन समीक्षा के अवसर सीमित हो जाते हैं। यद्यपि कुछ विधायकों की प्रश्न पूछने में सक्रियता सराहनीय है, लेकिन यह समग्र विधायी निष्क्रियता की भरपाई नहीं कर सकती।