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नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति के उस बयान के बाद भारत में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है जिसमें उन्होंने कहा कि भारत जल्द ही रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। इस पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर तीखा हमला किया है। एक सार्वजनिक संबोधन में श्री गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी नेतृत्व से “डरे हुए हैं” और उनके दबाव में भारत की संप्रभु निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो रही है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत, पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद, अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से बड़ी मात्रा में रियायती कच्चे तेल का आयात कर रहा है। भारत सरकार लगातार यह तर्क देती रही है कि उसके फैसले पूरी तरह से राष्ट्रीय हितों से प्रेरित हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति के इस अप्रत्याशित दावे ने भारत की कूटनीतिक स्थिति पर एक नया दबाव बना दिया है। सरकार की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की नीति के लिए एक परीक्षा है। नई दिल्ली को वाशिंगटन के साथ अपने बढ़ते रणनीतिक संबंधों और मॉस्को के साथ अपने ऐतिहासिक और ऊर्जा-आधारित संबंधों के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखना होगा। विपक्ष इस मुद्दे का उपयोग सरकार को एक कमजोर और बाहरी शक्तियों के समक्ष झुकने वाली सरकार के रूप में चित्रित करने के लिए कर सकता है, जिससे यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

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