चंडीगढ़: हरियाणा के एक वरिष्ठ IPS के आत्महत्या मामले में जांच आठ दिनों से रुकी हुई है। परिवार द्वारा पोस्टमार्टम कराने से लगातार इनकार करने के बाद, चंडीगढ़ पुलिस ने इस गतिरोध को तोड़ने के लिए स्थानीय अदालत का रुख किया है। पुलिस ने अपनी याचिका में शव का पोस्टमार्टम कराने की अनुमति मांगी है, जो जांच के लिए एक अनिवार्य प्रक्रिया है। पुलिस के आवेदन पर कार्रवाई करते हुए अदालत ने मृतक अधिकारी की पत्नी को एक औपचारिक नोटिस जारी किया है। उन्हें 15 अक्टूबर तक अपना पक्ष रखने या जवाब दाखिल करने का समय दिया गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि समय सीमा तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है, तो पुलिस की याचिका की योग्यता के आधार पर फैसला सुनाया जाएगा।
यह मामला कानूनी अनिवार्यताओं और शोकाकुल परिवार की भावनाओं के बीच टकराव को उजागर करता है। पोस्टमार्टम में इस तरह की असाधारण देरी जांच के लिए महत्वपूर्ण सबूतों को प्रभावित कर सकती है। पुलिस के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना अंतिम विकल्प था, जो दर्शाता है कि आपसी बातचीत के सभी प्रयास विफल रहे। अब अदालत का निर्णय ही इस संवेदनशील मामले में जांच की दिशा तय करेगा।