नई दिल्ली/वैश्विक। 28 सितंबर 2025 को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, हृदय रोग (कार्डियोवैस्कुलर डिजीज – CVD) दुनिया भर में मौत का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। विभिन्न अध्ययनों और समाचार स्रोतों से पता चला है कि वर्ष 2023 में वैश्विक स्तर पर हुई कुल मौतों में से एक-तिहाई के लिए हृदय संबंधी बीमारियाँ जिम्मेदार थीं। यह आँकड़ा चिकित्सा जगत के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
द टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि जहाँ उच्च रक्तचाप को हृदय रोगों का एक प्रमुख कारक माना जाता है, वहीं यह एकमात्र दोषी नहीं है। विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि हृदय रोगों की बढ़ती व्यापकता के पीछे कई जटिल कारक एक साथ काम करते हैं। केवल रक्तचाप पर ध्यान केंद्रित करना समस्या के समाधान के लिए अपर्याप्त है।
आनुवंशिक प्रवृत्तियों के अतिरिक्त, आधुनिक जीवनशैली के कई पहलू, जैसे अस्वास्थ्यकर खानपान, शारीरिक निष्क्रियता, अत्यधिक तनाव, धूम्रपान और शराब का सेवन, हृदय रोगों के जोखिम को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाते हैं। पर्यावरणीय कारक और सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ भी इस समस्या को गंभीर बनाती हैं।
हृदय रोगों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण आवश्यक है। इसमें नियमित स्वास्थ्य जाँच, संतुलित आहार, व्यायाम और तनाव प्रबंधन शामिल है। इसके साथ ही, व्यापक सार्वजनिक जागरूकता और निवारक नीतियों को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है, ताकि लोग रक्तचाप के अलावा अन्य सभी जोखिम कारकों को समझकर उनका प्रबंधन कर सकें। यह सामूहिक प्रयास ही इस वैश्विक चुनौती का सामना करने में सहायक होगा।