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उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार, 26 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए एक कथित माओवादी के शव को संरक्षित रखने का निर्देश दिया है। यह आदेश उच्च न्यायालय के अंतिम फैसले तक लागू रहेगा। समाचारों के अनुसार, मारे गए व्यक्ति की पहचान प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) सदस्य कथा रामचंद्र रेड्डी के रूप में की जा रही है। पुलिस का दावा है कि उसे एक अभियान में मार गिराया गया था, लेकिन यह ‘फर्जी मुठभेड़’ के आरोपों से घिरा है।

सीपीआई (माओवादी) की दंतेवाड़ा-कोंटा सब-जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) ने इस घटना को “फर्जी मुठभेड़” बताया है। उनका आरोप है कि हालिया हत्याएं आत्मसमर्पणों की बढ़ती संख्या के कारण सुरक्षा बलों पर बढ़ रहे दबाव का परिणाम हैं। संगठन के अनुसार, सुरक्षा बल माओवादी कैडरों में भय पैदा करने और आत्मसमर्पण रोकने के लिए कथित तौर पर ऐसे कदम उठा रहे हैं। इस स्थिति ने क्षेत्र में तनाव बढ़ाया है।

सर्वोच्च न्यायालय का यह कदम कथित न्यायेतर हत्याओं में पारदर्शिता और जवाबदेही हेतु महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ में मुठभेड़ों की वैधता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। शव को संरक्षित रखने से विस्तृत फॉरेंसिक जांच की संभावना बढ़ती है, जिससे निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। यह न्यायिक हस्तक्षेप मानवाधिकारों के संरक्षण और सत्य की स्थापना में सहायक होगा।

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