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प्रिय पाठकों ,
आज हमलोग वैश्वीकरण के दौर में जी रहे हैं और इस दौर में हर छोटे बड़े देश की अपनी महत्ता है और इस महत्ता को बनाए रखने में वैश्विक संस्थाओं की अपनी भूमिका है लेकिन पिछले कुछ वर्षो से खासकर पिछले एक दसक में इन संस्थाओं ने अपनी साख खोई है। दरअसल , बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में खासकर द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद काफी सारे औपनिवेशिक शक्तियों से आजाद हुए और कई नए देशों का जन्म हुआ । इन देसो के अस्तित्व में आने के बाद ये महसूस किया जाने लगा की इन नए देशों के सार्वभौमित्व की रक्षा और उनके सामाजिक और आर्थिक उन्नति के लिए संपूर्ण विश्व को आगे आना होगा और इसलिए समय समय पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास हुए और इन संगठनो का निर्माण हुआ पर धीरे धीरे इनका प्रभाव भी काम होने लगा और वर्तमान में तो ये मंच या तो कही दिखे ही नहीं या फिर पूर्वाग्रह से प्रेरित दिखे। आइये इस तरह के कुछ संगठनो का आकलन करें –
1) UNSC ( United Nations Security Council) –
UNSC की स्थापना 1945 में हुयी और इसका मुख्य कार्य अंतर्राष्ट्रीय विवादों को ख़त्म कर शांति की स्थापना करना है लेकिन वर्तमान में देखें तो पुरे विश्व में छोटे बड़े लगभग 50 युद्ध चल रहे है और कुछ का असर अंतर्राष्ट्रीय स्टार पर है जैसे रूस – यूक्रेन युद्ध , इसराइल – फिलिस्तीन युद्ध इत्यादि लेकिन इन युद्धों को रोकने में या इनके बीच मध्यस्त की भूमिका में दिखने में UNSC की रूचि नहीं दिखी है। ये युद्ध अपने हिसाब से शुरू हुए और चलते ही जा रहे है , जिससे पूरा विश्व प्रभावित हुआ है।
2) WTO ( World Trade Organization ) –
WTO की स्थापना 1995 को हुई थी जिसका मुख्य कार्य वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर Tarif बाधाओं को कम करना है पर हमने देखा की पिछले कुछ महीनो में अमेरिका नेअपनी मर्जी से पुरे विश्व में Tarif लगाया जिससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को काफी घाटा हुआ और मंदी जैसी स्थिति की और विश्व जा रहा है लेकिन यहाँ भी WTO निष्क्रिय बनी रही और कोई प्रतिक्रिया तक देने में असमर्थ दिखी।
3) UNHRC (United Nations Human Rights Commission ) –
UNHRC की स्थापना 2006 को हुई तथा इसका मुख्य कार्य विश्व भर में मानवाधिकारों की रक्षा करना है लेकिन बीते कुछ वर्षो में कई ऐसे उदहारण है जैसे – बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार, बलोचिस्तान में पाकिस्तान का अत्याचार या फिर कई अफ़्रीकी देशों में सैन्य शासन और फिर मानवाधिकारों का उल्लंघन लेकिन इन जगहों पर UNHRC ने पूरी चुप्पी साधे रखी ।
4) IMF & World Bank –
इन दोनों संस्थाओं का गठन 1944 में हुआ और इनका मुख्य काम क्रमश सदस्य देशों की अर्थव्यवस्था को संकट के समय आपातकालीन मदद देना और विकास योजनाओं और गरीबी हटाने के लिए लम्बी अवधी के ऋण देना है लेकिन हम सूक्ष्म विश्लेषण करने पर पाते है की अतीत में चाहे श्रीलंका में आर्थिक संकट हो या ज़िम्बाब्वे में मुद्रास्फीति के कारन लोग भुखमरी का शिकार हो रहे हो या दक्षिण अमेरिकी देशों का आर्थिक संकट हो , इन संस्थाओं ने अपनी सक्रियता काम ही दिखाई है ।
ऊपर के उदाहरणों से ये बात स्पष्ट है की चाहे हम कितनी भी समानता की बात कर ले लेकिन इन संस्थाओं को पश्चिमी देसो और अमेरिका के प्रभुत्व से मुक्त होने में अभी समय लगेगा ।
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