Mental Healthcare Act, 2017 : अधिकार, प्रक्रिया और महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान (Hindi)

भारत में मानसिक स्वास्थ्य लंबे समय तक एक उपेक्षित विषय रहा। मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों को अक्सर सामाजिक भेदभाव, कानूनी अस्पष्टता और उचित चिकित्सा सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता था। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 (Mental Healthcare Act, 2017) लागू किया।

यह अधिनियम मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करता है, उन्हें सम्मानजनक उपचार सुनिश्चित करता है और सरकार पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी तय करता है।

इस कानून का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को सम्मान, उपचार और कानूनी सुरक्षा मिले।


Mental Healthcare Act, 2017 क्या है ?

Mental Healthcare Act, 2017 एक आधुनिक और अधिकार-आधारित कानून है जिसका उद्देश्य मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को बेहतर उपचार और कानूनी संरक्षण देना है।

इस अधिनियम के प्रमुख उद्देश्य हैं:

मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच

मरीज के अधिकारों की सुरक्षा

सम्मानजनक उपचार की गारंटी

सरकार की जवाबदेही तय करना

यह कानून Mental Health Act 1987 की जगह लागू किया गया था।


मानसिक बीमारी की कानूनी परिभाषा

(Section 2(s), Mental Healthcare Act 2017)

इस अधिनियम के अनुसार Mental Illness का अर्थ है:

ऐसी मानसिक स्थिति जिसमें व्यक्ति की सोच, भावना, व्यवहार या निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो जाए और जिससे उसके दैनिक जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़े।

इसमें शामिल हो सकते हैं:

गंभीर अवसाद (Depression)

सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia)

बाइपोलर डिसऑर्डर

अन्य गंभीर मानसिक विकार

हालांकि केवल सामान्य तनाव या साधारण मानसिक परेशानी को मानसिक बीमारी की श्रेणी में नहीं रखा गया है।


मानसिक रोगियों के अधिकार

(Section 18–28, Mental Healthcare Act)

इस अधिनियम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्तियों को कई कानूनी अधिकार देता है।

  1. उपचार का अधिकार

(Right to Access Mental Healthcare – Section 18)

हर व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का अधिकार है।

सरकार का कर्तव्य है कि वह पर्याप्त अस्पताल, उपचार केंद्र और सुविधाएं उपलब्ध कराए।


  1. सम्मान और गरिमा का अधिकार

(Section 20)

मानसिक रोगी के साथ किसी भी प्रकार का:

अपमान

दुर्व्यवहार

अमानवीय व्यवहार

कानूनन प्रतिबंधित है।


  1. गोपनीयता का अधिकार

(Right to Confidentiality – Section 23)

मरीज की व्यक्तिगत जानकारी और चिकित्सा रिकॉर्ड को गोपनीय रखना अनिवार्य है।

डॉक्टर बिना अनुमति किसी को यह जानकारी साझा नहीं कर सकते।


  1. कानूनी सहायता का अधिकार

(Section 27)

मानसिक रोगी को न्यायिक प्रक्रिया में Legal Aid प्राप्त करने का अधिकार है।


Advance Directive क्या है ?

(Section 5–13)

Advance Directive इस कानून की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है।

इसका अर्थ है कि कोई व्यक्ति पहले से लिखित रूप में यह तय कर सकता है कि:

यदि भविष्य में उसे मानसिक बीमारी हो जाए

तो उसका इलाज कैसे किया जाए

कौन-सा उपचार दिया जाए या न दिया जाए

डॉक्टरों को सामान्यतः इस निर्देश का पालन करना होता है।


Nominated Representative

(Section 14–17)

मानसिक रोगी अपने लिए एक Nominated Representative नियुक्त कर सकता है।

यह व्यक्ति:

मरीज के हितों की रक्षा करता है

उपचार संबंधी निर्णयों में मदद करता है

आवश्यक होने पर कानूनी प्रक्रिया में प्रतिनिधित्व करता है।


मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड

(Mental Health Review Board – Section 73–82)

इस अधिनियम के तहत Mental Health Review Board की स्थापना की गई है।

इस बोर्ड के कार्य:

मरीज के अधिकारों की सुरक्षा

जबरन भर्ती (Involuntary Admission) की समीक्षा

शिकायतों का समाधान

यदि किसी मरीज को लगता है कि उसके अधिकारों का उल्लंघन हुआ है तो वह इस बोर्ड के पास शिकायत कर सकता है।


अस्पताल में भर्ती की प्रक्रिया

(Section 86–98)

मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के तहत अस्पताल में भर्ती के लिए स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

  1. स्वैच्छिक भर्ती

(Voluntary Admission – Section 86)

यदि व्यक्ति स्वयं इलाज कराना चाहता है तो वह स्वेच्छा से अस्पताल में भर्ती हो सकता है।


  1. समर्थित भर्ती

(Supported Admission – Section 89–90)

यदि व्यक्ति स्वयं निर्णय लेने में सक्षम नहीं है तो:

परिवार

Nominated Representative

की मदद से भर्ती किया जा सकता है।

लेकिन यह प्रक्रिया कानूनी निगरानी में होती है।


आत्महत्या के प्रयास को अपराध से मुक्त करना

(Section 115, Mental Healthcare Act)

इस अधिनियम की एक ऐतिहासिक व्यवस्था है।

Section 115 के अनुसार:

यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या का प्रयास करता है तो यह माना जाएगा कि वह गंभीर मानसिक तनाव में था।

इसलिए उसे अपराधी नहीं बल्कि उपचार और सहायता की आवश्यकता वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाएगा।

सरकार का कर्तव्य है कि ऐसे व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराई जाए।


सरकार की जिम्मेदारियां

(Section 18, 29)

इस कानून के तहत सरकार पर कई जिम्मेदारियां तय की गई हैं:

मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना

सरकारी अस्पतालों में उपचार

मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना

पुनर्वास सेवाएं प्रदान करना


मानसिक स्वास्थ्य और नए आपराधिक कानून

हालांकि मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम मुख्य रूप से उपचार और अधिकारों से संबंधित है, लेकिन कुछ मामलों में नए आपराधिक कानूनों के साथ इसका संबंध बन सकता है।

उदाहरण के लिए:

यदि मानसिक बीमारी से संबंधित मामले में आपराधिक प्रक्रिया होती है तो
Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) के प्रावधान लागू हो सकते हैं।


सामाजिक दृष्टिकोण का महत्व

मानसिक बीमारी केवल चिकित्सा समस्या नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता का विषय भी है।

अक्सर लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को छिपाते हैं क्योंकि समाज में अभी भी इसके प्रति संकोच और गलत धारणाएं मौजूद हैं।

इस अधिनियम का उद्देश्य केवल उपचार देना नहीं बल्कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना भी है।


निष्कर्ष

Mental Healthcare Act 2017 भारत में मानसिक स्वास्थ्य अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रगतिशील कानून है।

यह अधिनियम मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को:

सम्मान

उपचार

कानूनी सुरक्षा

प्रदान करता है।

मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शारीरिक स्वास्थ्य। इसलिए समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है कि मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लिया जाए और जरूरतमंद लोगों को उचित सहायता प्रदान की जाए।


Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी विशेष मामले में कानूनी सलाह के लिए योग्य विधि विशेषज्ञ से परामर्श करना उचित होगा।

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