Introduction

J.J Act

J.J Act 2015 बच्चों की देखभाल, संरक्षण, पुनर्वास, गोद लेने और कानून के उल्लंघन से जुड़े मामलों के लिए बनाया गया व्यापक कानून है। यह 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को दो श्रेणियों—अपराध करने वाले बच्चे और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे—में बाँटकर उनकी सुरक्षा व सुधार सुनिश्चित करता है।


Major Sections of (J.J Act,2015)(Expanded Interpretation)


Section 2 – Key Definitions

(J.J Act,2015) “child”, “child in conflict with law”, “child in need of care and protection”, “foster care”, “adoption”, “custody”, “juvenile home”, और “special home” जैसी महत्वपूर्ण परिभाषाएँ देता है। यह धारा यह समझने में सहायता करती है कि किस प्रकार के बच्चे किस श्रेणी में आएँगे और उनके लिए कौन-सी प्रक्रिया लागू होगी। यह अधिनियम की रीढ़ है और सभी प्रावधानों की सही व्याख्या सुनिश्चित करती है।


Section 4–7 – Juvenile Justice Boards (JJB)

इन धाराओं के तहत प्रत्येक जिले में जेजेबी (Juvenile Justice Board) का गठन अनिवार्य है। यह बोर्ड बच्चों के खिलाफ दर्ज अपराधों की सुनवाई करता है और बच्चे-हितैषी वातावरण में कार्य करता है। बोर्ड में एक न्यायिक सदस्य और दो सोशल वर्कर होते हैं। जेजेबी बच्चे के मानसिक विकास, परिस्थितियों और सामाजिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेता है, जिससे बच्चा सुधारात्मक दिशा में आगे बढ़ सके।


Section 27–30 – Child Welfare Committees (CWC)

CWC उन बच्चों के लिए जिम्मेदार है जिन्हें संरक्षण की आवश्यकता है। इसमें परिवार द्वारा छोड़े गए बच्चे, अनाथ, लापता बच्चे, शोषण के शिकार, बाल मजदूरी में पाए गए या मानव तस्करी से मुक्त बच्चे शामिल हैं। CWC बच्चे की सुरक्षा, भोजन, शिक्षा, चिकित्सा सहायता, पुनर्वास और परिवार में वापसी से संबंधित सभी निर्णय लेता है। यह समिति बच्चों की सुरक्षा का मुख्य आधार बनती है।


Section 74 – Prohibition of Disclosure of Identity

किसी भी बच्चे की पहचान—नाम, फोटो, पता, स्कूल, रिश्तेदार आदि—को मीडिया या किसी सार्वजनिक मंच पर उजागर करना अपराध है। इसका उद्देश्य बच्चे को सामाजिक अपमान, मानसिक तनाव और शोषण से बचाना है। इस धारा के उल्लंघन पर सजा और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।


Section 8–12 – Procedure for Children in Conflict with Law

इन धाराओं के अंतर्गत अपराध करने वाले बच्चों की प्रक्रिया वयस्क अपराधियों से अलग रखी जाती है। बच्चे को पुलिस स्टेशन में नहीं रखा जाता, बल्कि विशेष बाल संरक्षण इकाई के माध्यम से produced किया जाता है। जेजेबी बच्चे की आयु, मानसिक स्थिति, परिवार पृष्ठभूमि और अपराध की गंभीरता के आधार पर प्रक्रिया तय करता है। उद्देश्य दंड नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास है।


Section 15 – Heinous Offences by Children Aged 16–18

जेजे एक्ट 2015 में बड़ा बदलाव यह है कि 16–18 वर्ष आयु के बच्चों द्वारा किए गए heinous offences (जैसे हत्या, बलात्कार, अपहरण) में preliminary assessment की जाती है। यदि पाया जाए कि बच्चा मानसिक रूप से अपराध समझने योग्य है, तो उसे वयस्क के रूप में भी ट्रायल किया जा सकता है। यह विवादास्पद लेकिन व्यावहारिक प्रावधान है।


Section 37–48 – Child Care Institutions

ये धाराएँ बाल गृह, विशेष गृह, observation homes, special adoption agencies, foster families और rehabilitation centers को नियंत्रित करती हैं। इन संस्थानों की जिम्मेदारी बच्चों को रहने, पढ़ने, सुरक्षा, चिकित्सा और मानसिक सहायता प्रदान करना है। सरकार समय-समय पर निरीक्षण कर इन संस्थानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करती है।


Section 50–56 – Foster Care, Sponsorship & Aftercare

जेजे एक्ट बच्चे के दीर्घकालिक विकास पर ध्यान देता है।

  • Foster care: बच्चे को सुरक्षित परिवार वातावरण उपलब्ध कराया जाता है।
  • Sponsorship: आर्थिक सहायता द्वारा शिक्षा और जीवन स्तर सुधारा जाता है।
  • Aftercare: 18 वर्ष के बाद भी सहायता, कौशल प्रशिक्षण व पुनर्वास उपलब्ध कराया जाता है।

ये प्रावधान बच्चों के भविष्य को सुरक्षित और स्थिर बनाते हैं।


Section 57–73 – Adoption (गोद लेना)

जेजे एक्ट गोद लेने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और कानूनी बनाता है।

  • सभी adoptions अब CARA (Central Adoption Resource Authority) द्वारा संचालित होते हैं।
  • कानून तीन प्रकार के adoption को मान्यता देता है—
    1. In-country adoption
    2. Inter-country adoption
    3. Relative adoption
      यह प्रक्रिया बच्चे के सर्वोत्तम हित (best interest of the child) पर आधारित होती है।

Section 75 – Cruelty to Child

किसी बच्चे के साथ अत्याचार, दुर्व्यवहार, मानसिक या शारीरिक हिंसा, उपेक्षा, अनुचित व्यवहार या खतरनाक गतिविधियों में शामिल करना अपराध है। दोषी को 3 वर्ष तक की कैद और जुर्माना हो सकता है। यह धारा बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करती है।


Section 76–79 – Child Trafficking & Sale

मानव तस्करी, बच्चे को बेचने, बंधुआ मजदूरी करवाने या अवैध गोद लेने के प्रयास जैसे अपराधों पर कठोर दंड है। अपराध की गंभीरता के आधार पर सजा 5 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक हो सकती है। यह धारा बच्चों को शोषण के सबसे खतरनाक रूपों से बचाती है।


Section 86 – Offences by Child Care Institutions

बाल गृह, अनाथालय, shelter homes आदि द्वारा किए गए अपराधों या लापरवाही पर संस्था के सदस्यों के विरुद्ध दंड का प्रावधान है। यह नियम संस्थानों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।


Link With Other Laws (संबंधित कानूनों से संबंध)

1. POCSO Act, 2012

J.J Act,2015 और पॉक्सो कई मामलों में साथ-साथ लागू होते हैं। POCSO यौन अपराधों की जांच करता है, जबकि जेजे एक्ट बच्चे के पुनर्वास और सुरक्षा से जुड़ा है।

2. BNS, 2023

हत्या, अपहरण, grievous hurt, चोरी, धमकी जैसे अपराध यदि बच्चे द्वारा किए जाएँ, तो BNS की संबंधित धाराएँ जेजे एक्ट के साथ पढ़ी जाती हैं।

3. BSA, 2023 (Evidence Act)

बच्चों के बयान, electronic evidence और संवेदनशील साक्ष्य इस अधिनियम की विशेष प्रक्रियाओं के अनुसार स्वीकारे जाते हैं।

4. BNSS, 2023 (CrPC)

FIR, bail, arrest और कोर्ट प्रक्रिया BNSS की धारा अनुसार संचालित होती है, लेकिन बच्चों हेतु विशेष प्रावधान लागू रहते हैं।


Conclusion

J.J Act,2015 बच्चों की सुरक्षा, सुधार और भविष्य के निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कानून है। यह बाल अपराधों, शोषण और उपेक्षा से संबंधित मामलों में संतुलित, संवेदनशील और सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाता है, जिससे बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल सके।


Legal Disclaimer:


यह लेख केवल सामान्य शैक्षणिक (educational) एवं सूचना (informational) उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसे किसी भी प्रकार की legal advice, legal opinion या professional consultation का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

कानून समय, परिस्थितियों, संशोधनों (amendments) एवं न्यायालयीन व्याख्याओं (judicial interpretations) के अनुसार बदलता रहता है। इसलिए किसी भी कानूनी निर्णय, कार्यवाही या मुकदमे (case / proceeding) से पहले कृपया योग्य अधिवक्ता (qualified advocate) या legal professional से परामर्श अवश्य लें

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